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किडनी डोनर के लिए जरूरी दिशा-निर्देश




सबसे पहले हम आपको बधाई देना चाहेंगे की आपने अपनी किडनी डोनेट करने की निर्णय लिया है क्योंकी अंग दान सबसे बडा दान होता है.

किडनी डोनर ऑपरेशन के पहले OPD मैं ही सारी जांच कर ली गई है और आपको ऑपरेशन के लिए fit मानकर ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया है. ऑपरेशन के पहले आपकी जांचों से यह पता किया जाता है कि आप किडनी दान करने योग्य हो की नहीं, आपको ऐसी कोई बीमारी तो नहीं है जो भविष्य में आपको किडनी का मरीज बना सकती है. किडनी डोनर ऑपरेशन के लिए भर्ती होने के पहले या बाद में कभी भी आपके मन में यदि संशय पैदा होता है या आप अपना मन बदलते हैं तो आप कभी भी डॉक्टर को बता सकते हैं. आपको बेहोशी के पहले तक पूरी छूट होती है की आप कभी भी

डोनेशन के लिए मना कर सकते हैं.

    ऑपरेशन के पहले
  • ऑपरेशन के 1 दिन पहले आपको वार्ड में एडमिट किया जाएगा. आपकी सारी रूटीन ब्लड की जांच, छाती का एक्सरे, ईसीजी, डीटीपीए स्कैन, सीटी, एंजजयोग्राफी, एचएलए टेजस्टंग, ऑलग्रॉस मैच इन सभी जाटों को फिर से रिमूव किया जाएगा.
  • ऑपरेशन के पहले Anaesthesia विभाग के द्वारा पीएसी चेकअप करके आपकी फिटनेस देखी जाती है
  • ऑपरेशन के 1 दिन पहले डॉक्टर आपके और आपके रिश्तेदारों के साथ मिलकर मीटिंग करते हैं और ऑपरेशन से संबंधित सारी जानकारियां आपको और जिन्हे आप गुर्दा दान देने वाले हो उनको बताई जाती हैं. ऑपरेशन के बाद होने वाले काम्प्लीकेशन्स के बारे में भी विस्ततृ जानकारी दी जाती है. यह सभी चीजें विडियो रेकार्डिंग में की जाती हैं. अगर डोनर के ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव है या फिर पूर्ण रूप से किडनी डोनेट करने के लिए सहमत नहीं है तो वह कभी भी ऑपरेशन के पहले मना कर सकता है.
  • अगर आपकी खून पतला करने की कोई दवाई चल रही है तो वह ऑपरेशन के 1 हफ्ते पहले बंद करनी होती है. अगर आपकी खून पतला करने की कोई दवाई चल रही है तो वह ऑपरेशन के 1 हफ्ते पहले बंद करनी होती है.
  • ऑपरेशन से 1 दिन पहले रात में आप सामान्य खाना खा सकते हैं. आपको ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है ताकि डी-हाइड्रेशन अच्छा रहे.
  • अगर आपको कोनस्तिपेशन या कब्जयत की शिकायत होती है तो डॉक्टर को जरूर बताएं इसके लिए आपको लैक्सेटिव या फिर एनिमा दिया जा सकता है ताकि ऑपरेशन के बाद दिक्कत ना हो.
  • रात में 12:00 के बाद आपको कुछ भी खाने को या पीने को नहीं लेना है.
  • यदि आप की कुछ दवाईयां सुबह नियमित रूप से चल रही है तो नर्सिंग स्टाफ आपको सुबह 6:00 बजे एक घूंट पानी के साथ दे सकता है.
  • ऑपरेशन के 1 दिन पहले और ऑपरेशन वाले दिन स्नान जरूर करें.
  • अगर आप स्मोकर हैं तो ऑपरेशन के 15 दिन पहले स्मोककिंग आवश्यक रूप से छोड दें अन्यथा ऑपरेशन के बाद सास के दिक्कतें होने की संभावना ज्यादा होती हैं. ऑपरेशन के बाद भी स्मोककिंग पूर्णत वर्जित है.

    ऑपरेशन के बारे मे
  • ऑपरेशन वाले दिन ऑपरेशन शुरू होने के 2 घंटे पहले आपको ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया जाएगा. ऑपरेशन पूर्ण बेहोशी में किया जाता है जनरल एनएसथीसिया ऑपरेशन में करीब 3 से 4 घंटे लगते हैं. ऑपरेशन के बाद पेशाब के रास्ते एक नली हो सकती है. और पेट में एक गंदा खून निकालने के लिए ड्रेनेज ट्यूब हो सकती है. यह दोनों नदियां 1 से 2 दिन बाद निकाल दी जाती हैं.

    ऑपरेशन के बाद
  • ऑपरेशन के बाद आपको ऑपरेशन थिएटर के बाहर स्थित recovery आईसीयूमें 3 से 4 घंटे रखा जाता है. इसके बाद अगर आप स्टेबल कंडीशन में हैं तो आपको दसूरी मंजिल पर स्थित HDU में शिफ्ट किया जाएगा. रात भर आपको वही रखा जाता है. सुबह डॉक्टर्स के राउंड होने के बाद आपको आपके कमरे में शिफ्ट किया जाएगा. ऑपरेशन वाले दिन शाम को डॉक्टर के राउंड के बाद थोडा बहुत पानी पीने को दिया जाता है. खाना पीना अगले दिन डॉक्टर्स के राउंड के बाद डिसाइड किया जाता है.

    ऑपरेशन के अगले दिन LIQUID DIET चालूकर दी जाती है और आपको बिस्तर से निकाल कर चलाया जाता है. आपको डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज और खांसी करके बलगम निकालना होता है ताकि ऑपरेशन के बाद के न्यूमोनिया से बचा बचा जा सके.

    जब आप LIQUID DIET लेने लगते हो और पेट साफ हो जाता है तो फिर धीरे-धीरे आपको सॉफ्ट डाइट ( SOFT DIET ) जैसे की दलिया, खिचडी दिया जाता है.

    Normal Diet चालू करने में 2 से 3 दिन लगते हैं.
    पेशाब की नली अगले दिन निकाल दी जाती है और ड्रेनेज ट्यूब एक या दो दिन बाद निकाल ली जाती है. 3 से 4 दिन में आप की नर्मल डाइट चालू हो जाती है और आप पूर्ण रूप से चलने लगते हो और फिर आपकी छुट्टी कर दी जाती है.

    ऑपरेशन के बाद का दर्द
  • हर किसी का दर्द सहने का अलग-अलग लिमिट होता है. किसी पेशेंट में दर्द की दवाईयां बहुत कम लगती है और किसी में ज्यादा देनी पडती है. ऑपरेशन के बाद बेड से उठना चलना यह सब चीजें दर्द से जल्दी रिकवरी में आपकी मदद करता है. ऑपरेशन के बाद 5 दिन नियमित रूप से दर्द की दवाइयाँ दी जाती है. उसके बाद फिर दर्द की दवाइयाँ धीरे-धीरे कम कर दी जाती है. ऑपरेशन के बाद 6 दिन बाद दर्द काफी कम हो जाता है और 8 से 10 दिन में बिल्कुल खत्म हो जाता है

    ऑपरेशन के बाद होने वाली कब्जियत
  • ऑपरेशन के बाद दर्द की दवाईयों से कब्जियत हो सकती है इसलिए दर्द की दवाईयां कम से कम ली जाए तो अच्छा है. इसके अलावा कुछ दवाईयां दी जाती है ताकि पेट अच्छे से साफ हो सके. पानी का इंटेक अच्छा रखना होता है ताकि हाइड्रेशन अच्छा मेंटेन रहे. अगर आपका पेट अच्छे से साफ हो रहा है तो फिर नियमित रूप से कान्स्टीपेशन की दवाईयां लेने की जरूरत नहीं है.

    ऑपरेशन के घाव का ध्यान कैसे रखें
  • ऑपरेशन वाली जगह पर आमतौर पर खुलने वाले टांके लगाए जाते हैं जिनको निकालने की जरूरत नहीं पडती. अगर स्टेपल वपन या ना भूलने वाले टांके लगे हैं तो ऑपरेशन के 10 दिन बाद उन्हें निकलवाना होता है. ऑपरेशन के 3 से 4 दिन तक उसमें हम पानी ना लगाने की सलाह देते हैं उसके बाद आप शावर ले सकते हैं नहा सकते हैं और नहाने के बाद ऑपरेशन वाली एरिया को साफ कपडे से ड्राई करना होता है अगर ऑपरेशन वाली जगह से किसी प्रकार का लिक्विड ब्लड या पस निकलता है तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं. ऑपरेशन के बाद कम से कम 2 या 3 हफ्ते तक स्विमिंग पूल या बाथटब में ना नहाए|

    छुट्टी के बाद कब डॉक्टर को संपर्क करें?
  • छुट्टी के 5 दिन बाद आपको फॉलो विजजट के लिए बुलाया जाता है जिसमें आपका Wound चेक किया जाता है अगर टांके हैं तो निकाला जाता है.

  • छुट्टी के बाद अगर कभी भी निम्नलिखित परेशानी आती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
    • तेज बुखार आना
    • बहुत तेज खांसी आना या सांस में दिक्कत होना
    • जाम में बहुत ज्यादा जलन
    • ऑपरेशन वाली जगह से खून मवाद या पानी का रिसाव
    • कृष्ण वाली जगह तेज सूजन या उसका लाल पड जाना इंफेक्शन होना
    • एक या दोनों पैर में सूजन आना, सांस की दिक्कत होना

    ऑपरेशन के बाद कितना काम करें?
  • ऑपरेशन के बाद कम से कम 2 महीने तक भारी वजन नहीं उठाना है. भारी वजन उठाने से Wound खुल सकता है और हर्निया बन सकता है.
  • ऑपरेशन के बाद नियमित रूप से आपको चलना है और बहुत लाइट एक्सरसाइज कर सकते हैं. चलने से आपकी रिकवरी बहुत अच्छी होती है और आप जल्दी से फिर ड्यूटी ज्वाइन कर सकते हैं.
  • ऑपरेशन के करीब एक से डेढ़ महीने बाद आप कार या स्कूटर चला सकते हैं क्योंकि इसके बाद पेट का दर्द काफी कम या खत्म हो जाता है और अपने पैरों को भी आप तेजी से चला सकते हैं.

    काम कब वापस ज्वाइन कर सकते हैं?
  • यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या काम करते हैं? अगर आपका सिर्फ बैठने का काम है और काम ज्वाईन करना बहुत आवश्यक है, तो आप ऑपरेशन के 2 से 3 हफ्ते बाद यह काम चालूकर सकते हैं. लेकिन अगर आपका ज्यादा चलने फिरने या वजन उठाने का काम है, तो हमारी सलाह यह होती है कि ऑपरेशन के कम से कम 6 से 8 हफ्ते बाद ही यह काम चालूकरें. डॉक्टर को दिखाकर आप अपनी फिटनेस चेक करा सकते हैं उसके बाद डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं कि आप कब और कितना काम कर सकते हैं. अगर काम काफी ज्यादा वजन उठाने का है तो ऑपरेशन के बाद कम से कम 3 से 4 महीने इसके लिए रुकना चाहिए. अगर बहुत ज्यादा हैवी वर्क है तो 6 महीने नहीं यह काम नहीं करना चाहिए.

    Follow Up Appointment ( आपको कब कब दिखाना है)
  • अगर आप भोपाल से बाहर के रहने वाले हैं तो ऑपरेशन के बाद आपको भोपाल में ही 1 हफ्ते के लिए रुकना होता है. ताकि कुछ भी ददक्कत होने पर आप तुरंत डॉक्टर को दिखा सकें.
    • छुट्टी होने के पांच-छह दिन बाद आपको बुलाया जाता है और आपका Wound चेक ककया जाता है और टांके निकाले जाते हैं.
    • Follow up visit में आपका कुछ ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट किए जाते हैं और आपको खाने-पीने और एक्सरसाइज से संबंधित सलाह दी जाती है. इसके बाद आप अपने शहर वापस जा सकते हैं और एक महीने बाद फॉलो विजीट पर आ सकते हैं.
    • आपको हर साल कम से कम एक बार अपने टेस्ट कराने पडते हैं. जिसमें कुछ ब्लड टेस्ट जैसे कि हीमोग्लोबीन, किडनी फंक्शन टेस्ट, यूरिन एग्जालमनेशन, ब्लड प्रेशर मेजरमेंट इत्यादि किए जाते हैं. जरूरत पडने पर किडनी की सोनोग्राफी भी की जाती है.
    • हमारी सलाह है कि आप कम से कम साल में एक बार नियमित रूप से यह सारी चेकअप अवश्य कराएं ताकि भविष्य में ककडनी या उस से रिलेटेड कुछ प्रॉब्लम होती है तो उसको समय रहते पता किया जा सके और उसका उचित इलाज किया जा सके.
    • रिसर्च में यह पाया गया है कि ऐसे पेशेंट जो किडनी डोनेट करते हैं उनमें ब्लड प्रेशर या किडनी से जुडी बीमाररयों की संभावाना एक नार्मल आदमी की तरह होती है. फिर भी हर साल चेकअप कराने से हम किडनी से जुडी कोई भी परेशानी पहले से पता कर सकते है

    Follow Up Appointment ( आपको कब कब दिखाना है)
  • हर 6 महीने में आपको अपना ब्लड प्रेशर चेक कराना है. जरूरी नहीं इसके लिए आप डॉक्टर के पास जाएं. आप घर पर या आसपास के डॉक्टर के क्लीनिक में ब्लडप्रेशर चेक करा सकते है.
  • किडनी डोनेट करने के बाद हर साल आप खून और पेशाब के टेस्ट कराएं, ब्लड प्रेशर चेक कराएं और सोनोग्राफी कराएं. इसलिए हमारी सलाह यह रहेगी कि किडनी डोनर को कम से कम साल में एक बार आकर जरूर मिलना चाहिए.
  • शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द होने पर दर्द की दवाईयां लेना आम बात है. ऐसे पेशेंट जो ककडनी डोनेट कर चुके हैं उनके लिए यह आवश्यक है कि कुछ खास दर्द की दवाईयां जैसे कि (dynapar, voveran , ibugesic, ibuprofen , nimesulide) उनको नहीं लेनी चाहिए. सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही दर्द की दवाइयां लेनी चाहिए क्योंकि कुछ दर्द की दवाइयाँ किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है
  • किसी भी प्रकार की हर्बल दवाईयां या सप्लीमेंट लेने के पहले नेफ्रोलॉजी से जरूर सलाह करें. क्योंकि बहुत सारी हर्बल दवाईयां किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं.
  • भविष्य में कभी भी अगर आप का सीटी स्कैन या M.R.I. होता है तो इसमें आईवी कंट्रास्ट avoid करना चाहिए. अगर बहुत जरूरी हो तभी आईवी कंट्रास्ट या डाई देना चाहिए. तो जब भी सिटी स्कैन या MRI प्लान हो तो आप अपने डॉक्टर को अपने किडनी डोनर होने का जरूर बताएं.
  • अपना वजन कंट्रोल में रखें. मोटापा ना आने दे यह देखा गया है की वजन बढ़ने पर किडनी की बीमारियाँ बढ़ती हैं इसलिए नियमित रूप से आप एक्सरसाइज करें.
  • ऐसा कोई खेल जिसमें काफी ज्यादा चोट लगने की संभावना है वह ना खेलें जैसे की फुटबॉल.
  • अगर आपको भविष्य में कोई बीमारी होती है जो की किडनी को प्रभावित कर सकती है तो आप तुरंत नेफ्रोलोजिस्ट से सलाह लें.





  • डॉ. संतोष अग्रवाल
    Urologist and kidney transplant surgeon
    Bansal hospital, Bhopal

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